BPO का फुल फॉर्म

0
481

इस आर्टिकल में हमने आपको BPO, KPO  और CALL CENTER से जुडी बहुत सी बातें बताई हैं, तो अगर आप इन फील्ड में काम करना चाहते हैं तो हमारे आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको इनके संबंधित सभी जानकारी मिल जाएगी, हमने इस आर्टिकल में आपको बताया की BPO, KPO और CALL CENTER क्या होता हैं और इनमे किश तरह के काम करना होता हैं !

तो फिर चलिए BPO के बारे में Details में जानकारी प्राप्त करते है.

BPO Ka Full Form :-  BPO ka full फॉर्म “Business Processing Outsourcing” होता है ! इसको हम हिंदी भाषा में ‘ व्यापार प्रसंस्करण आउटसोर्सिंग ‘ भी बोलते है  !

BPO Ka Full Form in Hindi : –  जैसे की मैंने आपको ऊपर बताया की BPO का फुल फॉर्म English में “Business Processing Outsourcing “ होता है, हिंदी में BPO का मतलब ‘ व्यापार प्रसंस्करण आउटसोर्सिंग होता है !

BPO का मतलब क्या होता है?

बीपीओ अर्थात एक Business Processing Outsourcing ऐसी व्यापारिक प्रक्रिया है, जिसमे किसी Company द्वारा अपने कार्य को किसी अन्य तीसरी पार्टी द्वारा कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से पूरा किया जाता है ! दूसरे शब्दों में बोले जाए तो बीपीओ एक ऐसा कॉन्ट्रैक्ट है !

जहाँ अपने बिजनेस के लिए अन्य पार्टी को नियुक्त कर उनके द्वारा अपने customer को Service प्रदान की जाती है !  जिसमे अनेक प्रकार के Division होते हैं जैसे की – Call center ,accounting का कार्य, किसी कंपनी के कर्मचारियों का पेरोल बनाना इत्यादि होता है !

BPO kya hai ?

अधिकांशत : बड़ी – बड़ी कम्पनिया या संस्थांए अपने काम को खुद न करते हुए वह इसके लिए थर्ड पार्टी से कॉन्ट्रैक्ट करते है ! इस से उनका कार्य बड़ी सरलता से समय पर हो जाता हैं इससे उनको धन लाभ के साथ कई अन्य प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं !

सबसे बड़ा लाभ यह होता है की इसके लिए उन्हें अधिक worker’s और employes को हायर करने, उनकी सैलेरी और उनकी देख रेख आदि से छुटकारा मिल जाता है I हालाँकि थर्ड पार्टी के अंतर्गत यह कार्य करने वाले लोग उस क्षेत्र के प्रोफेशनल होते है !

वर्तमान में अधिकांश कंपनियां अपने कार्यों के लिए दूसरे देश के employe’s  हायर करते है ! जैसे की अमेरिकन कंपनियां अपने कार्यों को outsource करने के लिए indian organization से कॉन्ट्रैक्ट करते है , क्योंकि अमेरिका में यह कार्य कराने के लिए उन्हें एम्प्लॉयी को अधिक धन देना पड़ता है , जब कि इसी कार्य को किसी भारतीय organization से कराने पर उन्हें कम धनराशि देनी पड़ती है !

करियर इन BPO

व्यापार प्रसंस्करण आउटसोर्सिंग ( BPO ) में करियर करना बहुत बढ़िया विकल्प हैं ! दुनिया भर में जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी का विकास हो रहा हैं, ठीक वैसे -वैसे हैं आउटसोर्सिंग का मार्केट भी प्रगतिशील हो रहा हैं ! आजकल हमारे देश में विदोशों में लाखों युवक BPO कंपनी यो में काम कर रहे हैं !

किसी BPO कंपनी में काम करते हुए आप अपने कौशल को लगातार सुधार सकते हैं और ज्यादा positive, Productive और Creative बन सकते हैं, क्योकि आपको तरह-तरह के लोगों से विभिन्न मसलों के सिलसिले में रोजाना व्यवहार करना पड़ता हैं और आप विभिन्न मसलों को सुलझाने के skills कम उम्र में हैं सीख लेते है !

BPO Job क्या हैं ?

जबसे BPO की शुरवात हुई है, तब से हजारो तरह के job निकल कर सामने आये है ! जैसे कि -Data Entry Jobs, Delivery Boy Jobs, Call Center Executive, Accountant Jobs, House Keeping Jobs, Receptionist Jobs, Customer Care Jobs, Tele-caller, HR Manager, TCS जैसे बड़े Company में भी BPO के जॉब्स मिलते हैं !

बीपीओ Job अर्थात एक बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग ऐसी व्यापारिक प्रक्रिया है ! जिसमे किसी कंपनी द्वारा अपने कार्य को किसी अन्य तीसरी पार्टी द्वारा कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से पूरा किया जाता है !

दूसरे शब्दों में बोलै जाये तो बीपीओ एक ऐसा कॉन्ट्रैक्ट है ! जहाँ अपने बिजनेस के लिए अन्य पार्टी को नियुक्त कर उनके द्वारा अपने कस्टमर को सर्विस प्रदान की जाती है !

BPO में नौकरी के प्रकार

इस BPO में मुख्य रूप से दो प्रकार के नौकरिया आती हैं, जो निचे निम्नलिखित प्रकार से दिए गए हैं !

  • Back Office :-  इसमें एक Classified Outsource है, जिसमे Human Resource ,Finance और Accounting इत्यादि जैसे Internal Trade Operations शामिल होते है !
  • Front Office Outsourcing:- इसमें Call Center और अन्य Customer Service शामिल है!

यह नौकरी मुख्यरूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है ,जो पूरी तरह से Fresher है, यानि जिन्होने अभी तक कोई नौकरी नहीं की है ! इस नौकरी को करने से उन्हें एक बेहतर Exposure तथा अच्छी Experience मिलती है !

BPO Companies के फायदे

  • Increase Sales & Productivity :- BPO Companies को अपने मुख्य Business Areas पर ध्यान Focus करने में सक्षम बनता है ! यह समय बचाने का काम करता है और अन्य Projects में तेजी लाने में और अपने ग्राहक की सहायता करने में मदद करता है ! यहाँ Expert लोग काम को कुशलता से करते है जिसके कारण उत्पादकता में सुधार  होता है !
  • Reduce Costs :- अपना इन्वेस्टमेंट कम करना किस Companies को अच्छा नहीं लगेगा, Business Cost Reduce करने का महत्वपूर्ण काम BPO System करता है !  BPO केवल लागत कम नहीं करता बल्कि Productivity increase में और Revenue बढ़ाने में भी मदद करता है I आउटसोर्सिंग के कारन कंपनी को बेहतर सेवाएं कम दरों में प्राप्त होती हैं जिससे उन्हें बेहतर Market Position का लाभ और इसके अलावा Competition लाभ भी मिलता है !
  • System Utilization :- BPO सिमित Resources का Maximum Utilization करने के समक्ष बनता है ! Outsourcing नई श्रमता को जाँच ने का और संसाधनों को पुन:प्राप्त करने में मदद करता हैं ! इससे उत्पादकता बढ़ती है और Business Cost Reduce होता है !

BPO Job के नुकसान

  • Communication Problems :-  BPO में अक्सर Customers और Customer care agent के बीच Communication समस्या होने की संभावना होती है ! जैसे ग्राहक कहते कुछ और हैं और विक्रेता / कर्मचारी कुछ अलग ही सुनते हैं इसके कारण गलतफहमी होने के असर बढ़ जाते हैं ! बहुत बार Customers अपशब्द का भी प्रयोग करते है !
  • Job Timing :- इस BPO Job में काम का कोई एक समय Fixed नहीं होता है ! Employees को रात के समय भी Duty पर जाना पड़ता है, खास करके जब वो International Company में जॉब पर हो तो बदलते समय के कारण Health Problems होने की संभावना होती है !

बीपीओ के कितने प्रकार के होते है ?

कार्यों के अनुसार बीपीओ सिस्टम को ३ भागो में डिवाइड किया है , जो इस प्रकार है –

बीपीओ के कितने प्रकार के होते है ?

  1. ऑफ सोर्स आउटसोर्सिंग (Off Source Outsourcing) : –
    किसी कार्य को पूरा करने के लिए कोई कंपनी किसी दूसरे देश की कंपनी या ऑर्गोनाइजेशन के साथ में कॉन्ट्रैक्ट करती है ,तो उसे ऑफ सोर्स आउटसोर्सिंग कहते है !
  2. ऑन सोर्स आउटसोर्सिंग (On Source Outsourcing) : –
    On Source Outsourcing के अंतर्गत जब कोई कंपनी या संस्था अपने कार्यों को कराने के लिए अपने देश की किसी कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट करती है ! ऑन सोर्स आउटसोर्सिंग को डॉमेस्टिक आउटसोर्सिंग के नाम से भी जाना जाता हैं !
  3. नियर सोर्स आउटसोर्सिंग (Near Source Outsourcing)
    जब किसी ऑर्गोनाइजेशन द्वारा अपने कार्यों को कराने के लिए अपने पडोसी देशों की कंपनियों से कॉन्ट्रैक्ट साइन किया जाता है, तो इसे नियर सोर्स आउटसोर्सिंग कहते है !

Outsourcing का मतलब क्या है?

Outsourcing का मतलब बाहरी ठेका देना  याने की एक कंपनी किसी अंतरक कार्य के लिए दूसरी कंपनी के साथ समझौता करके उससे वह काम करवाती है !

Outsourcing का मतलब क्या है?

आउटसोर्सिंग का हिंदी मीनिंग :

Outsourcing को हिंदी में बाहरी ठेका कहते हैं ! या फिर ऑउटसोर्सिंग को साफ अर्थ किसी तीसरी पार्टी द्वारा निष्पादित कार्य को कहा जा सकता हैं !

ऑउटसोर्सिंग के लाभ

वैसे देखे जाये तो आउटसोर्सिंग बहुत सारे लाभ हैं ! आइये देखते हैं कौनसे -कौनसे लाभ हैं !

  1. समय की बचत !
  2. एक्सपरटाइज और व्यवसायिकता के लिए पहुँच देता हैं !
  3. एक काम परिचालन लागत !
  4. यह और अधिक लचीला और आरामदायक हैं !
  5. कुशल और कुशल संसाधनों तक पहुँच !
  6. ओवरहेड लागत में कमी !
  7. गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं में वृद्धि और उत्पादकता में सुधार !

आउटसोर्सिंग का एक और लाभ यह हैं की आउटसोर्सिंग फर्म के आक्रामक रणनीति से खुद को दूर करने की क्षमता हैं ! प्राप्य और संग्रह खातों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं !

प्राथमिक फर्म संबंधित निगम की अपनी छवि को बनाये रख सकती हैं ! जबकि संग्रह विभाग यह सुनिश्चित कर सकता हैं ! कि गई ग्राहक प्रदान कि गई सेवाओं के लिए भुगतान करें और ख़राब ऋण को कम करें !

KPO क्या हैं?

KPO ka full form “Knowledge Process Outsourcing” और हिंदी में KPO का मतलब ज्ञान प्रोसेस आउटसोर्सिंग  है ! Knowledge Process Outsourcing आउटसोर्सिंग का एक रूप हैं !

KPO क्या हैं?

जहा लागत या संसाधनों को बचाने के लिए एक ही संघठन के भीतर एक अलग कंपनी या सहायक द्वारा ज्ञान और सुचना संबंधीकाम किया जाता हैं !

आजकल कंपनिया अपने व्यापार के विस्तार के लिए दूसरी कंपनियों को काम देती हैं ! आपको बता दे कि प्रोसेस आउटसोर्सिंग  (KPO) आमतौर पर किसी भी कंपनी में KNOWLEDGE और INFORMATION के आधारित होता है ! जो आम तौर पर उच्चा स्तरीय पर शिक्षा प्राप्त होता है !

ज्ञान प्रोसेस आउटसोर्सिंग क्या हैं?

ज्ञान प्रोसेस आउटसोर्सिंग इसको इंग्लिश में KPO (Knowledge Process Outsourcing) कहते है ! इसमें किसी क्षेत्र के विशेष के रूप में सेवा प्रदान कि जाती हैं ! ज्ञान प्रोसेस आउटसोर्सिंग (KPO) यह व्यापार प्रसंस्करण आउटसोर्सिंग (BPO) का ही एक विषय हैं !

व्यापार प्रसंस्करण आउटसोर्सिंग (BPO) कि तरह ही ज्ञान प्रोसेस आउटसोर्सिंग (KPO) कि धारणा समान होती है ! जिसमे आम तौर पर कोई कंपनी या संघटन अपना काम तीसरी पार्टी से कराती हैं ! ज्ञान प्रोसेस आउटसोर्सिंग ( KPO ) किसी भी कंपनी का एक अहम् हिस्सा होता हैं !

प्रोसेस आउटसोर्सिंग (KPO) आम तौर पर व्यापार प्रसंस्करण आउटसोर्सिंग( BPO ) का उच्चा स्तर होता है ! इस प्रोसेस के तहत किसी कार्य के रूप में सर्विस दी जाती है ! आजकल कंपनिया अपने व्यापार के विस्तार के लिए दूसरी कंपनियों को काम देती हैं !

आपको बता दे कि प्रोसेस आउटसोर्सिंग (KPO) आमतौर पर किसी भी कंपनी में KNOWLEDGE और INFORMATION के आधारित होता है, जो आम तौर पर उच्चा स्तरीय पर शिक्षा प्राप्त होता है !

 BPO और Call Center के बीच क्या अंतर हैं ?

Call Center और BPO यह दोनों पूरी तरह से एक नहीं होते बल्कि इनके काम करने के तरीके में भिन्नता होती है ! दोनों के बीच के अंतर को निचे दर्शाया है :-

 BPO और Call Center के बीच क्या अंतर हैं ?

  • BPO कई तरह के काम Provide करता है जिनमें सेल्स एंड मार्केटिंग, कस्टमर सपोर्ट, डाटा एंट्री आदि शामिल होते है ! वही कॉल सेंटर स्वयं BPO का एक हिस्सा होता है ! कॉल सेंटर में सिर्फ कॉल उठाना और खुद कॉल करना शामिल होता हैं !
  • BPO में जैसे कई तरह के काम किये जाते है वैसे ही इसमें कई तरह की स्किल्स की भी जरुरत होती है ! वही इसमें नौकरी करने के लिए आपको अच्छी अंग्रेजी तथा कंप्यूटर की गहन जानकारी होनी जरुरी कॉल सेंटर में आपको कंप्यूटर का बेसिक ज्ञान तथा आपकी कम्युनिकेशन स्किल जबरदस्त होनी चाहिए !
  • BPO के जरिये कंपनियां अपने बिजनेस को आगे बढाती हैं, वही कॉल सेंटर सिर्फ क्लाइंट के साथ बिजनेस को बनाये रखने का तरीका हैं !
  • BPO का काम ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों प्लेटफार्म में किया जाता हैं ! जबकि कॉल सेंटर का काम ज्यादा तर ऑफलाइन ही होता हैं, क्योंकि इसमें कॉल अटेंड करने जरुरी होते हैं !
  • BPO एक पूरी प्रणाली होती हैं जिसका मुख्य उद्देश्य होता हैं अपने व्यवसाय के उत्पादकता को बढ़ाना ! वही कॉल सेंटर BPO का हिस्सा होती हैं ! इसलिए उसका मुख्य उद्देश्य होता हैं ग्राहक की सहायता करना तथा ग्राहक तक अपने उत्पादक का प्रचार – प्रसार करना !

Call Center और BPO की व्याख्या क्या हैं?

Call Center और BPO यह दोनों पूरी तरह से भिन्न हैं इसके लिए इनकी व्याख्या भी भिन्न हैं ! जैसे की Call Center एक तरह से Claint के साथ Buisness को बनाये रखने का तरीका होता होता है ! जब कि BPO अपने Buisness को आगे बढ़ाने का तरीका होता है ! BPO में Mail, Calls, Document, Meeting आदि सब कुछ आता हैं, जबकि Call Center में केवल Call उठाना और Call करना होता हैं !

Call Center कैसे खोले?

कॉल सेंटर बिज़नेस : आप सभी को पता है, आज कोरोना काल में किसी के पास भी जॉब नहीं है ! पर आप अपने घर में कॉल सेंटर आसानी से खोल सकते है ! क्योंकि इस के लिए अधिक स्थान की भी जरुरत नहीं होती हैं !

आपको को कॉल सेंटर के लिए प्रमुख रूप से अच्छी स्पीड के इंटरनेट कनेक्शन और लैपटॉप की जरुरत होती हैं ! साथ ही साथ यह बहुत काम निवेश के बिज़नेस हैं, जो की आप बहुत आसानी से शुरू कर सकते हैं !

आपको कम्पनिया मुख्य रूप से वित्तीय राशि भी प्रदान भी कर दी जाती हैं ! आपको बता दे आज बाजार में डिजिटल मार्किट में ही आपको वित्तीय राशि देखने को मिल जाती हैं, कॉल सेंटर रूचि के रूप में चलते हैं, हम बड़ी आसान तरीके से इस को शुरू कर सकते हैं !

आप किसी भी कम्पनी से संपर्क करके उन्हें वित्तीय फायदा दे सकते हैं ! परंतु आप को इस के लिए कम्युनिकेशन स्किल्स(Call Center Plan) अवश्य आणि चाहिए, आपको Maltitasking भी होना चाहिए, आपको विनम्रता भी रखनी होती हैं, जिस के बाद में ही आप धन राशि पा सकते हैं !

आज हमने इस आर्टिकल में क्या सीखा

आप BPO (Business Processing Outsourcing ), KPO (Knowledge Process Outsourcing ) और CALL CENTER में काम करना चाहते हैं ! तो आपको हमारा आर्टिकल जरूर पढ़ना चाहिए,  इससे आपको काफी फायदा होगा ! मित्रों अगर आपको कुछ समझ नहीं आया तो हमे निचे कमेंट करके बताये !

 

Previous articleमेम्स मीनिंग इन हिंदी
Next articleफेसबुक से पैसे कमाए..!
नमस्ते दोस्तों , मेरा नाम Suraj Indap और में merihindi.net का लेखक आपका स्वागत करता हु । मुझे Education के बारे में जानकारी पढ़ना और उन्हें सभी को बताने में आनंद मिलता है। अगर मेरे लिखे हुए लेख आपको पसंद आते हो तो शेयर जरूर करे ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here